Tuesday, June 17, 2008

शिव चालीसा ( SHIV CHALISA )


जय गणेश गिरिजा सुवन मंगल मूल सुजान !

कहत अयोध्या दास तुम देव अभय वरदान !

जय गिरिजा पति दीनदयाला सदा करत संतान प्रतिपाला !
भाला चंद्रमा सोहत नीके कानन कुंडल नागफनी के !
अंगा गौर शिरा गंगा बहाए मुण्डमाला तन छारा लगाये !
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहें छवि को देखा नागा मुनि मोहें !
मैना मातु की हवई दुलारी वामा अंगा सोहत छवि न्यारी !
करा त्रिशूल सोहत छवि भरी करत सदा शत्रुन छायकारी !

नंदी गणेश सोहें तहां कैसे सागर मध्य कमल हैं जैसे !

कार्तिक श्याम और गणराऊ या छवि को कही जाता ना काऊ !

देवन जबही जाया पुकारा तबाही दुख प्रभु आप निवारा !

किया उपद्रव तारक भारी देवन सब मिली तुम्ही जुहारी !





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